लेखनी कहानी -29-Nov-2022

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यादों के सहारे याद करते रहे तुम्हें दिन ढ़ल गया, रात के साए में चाँद पिघल गया, तू क्या गया महबूब मेरे, जिंदगी का सफर थम गया। कदम बढ़ाकर देखा होले-होले, ...

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